एक्सीडेंट में जान बचाने के लिए कारों के कौन से सबसे खतरनाक पार्ट्स बदल रहा है China? अभी पढ़ें रिपोर्ट!

China Car Features पर Ban लगाने वाला है। किस तरह के फीचर्स पर बैन लगाया जा सकता है। चीन ऐसा क्‍यों कर रहा है। कब से चीन में इन बदलावों को लागू किया जा सकता है। इस रिपोर्ट में पढ़ते हैं।

China Car Features पर बैन की तैयारी कर रहा है

चीन अपनी कंट्री में बेची जा रही कारों में कुछ खास तरह के फीचर्स पर बैन लगाने की तैयारी में है। चीन का मानना है कि इन फीचर्स की वजह से एक्‍सीडेंट के टाइम ज्‍यादा नुकसान हो सकता है। इसलिए इनको अब बैन करने के लिए ड्रॉफ्ट को भी ले आया गया है।

कौन से हैं फीचर्स

कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि चीन अपनी कंट्री में ऑफर की जा रही कारों में फ्लश डोर या पॉप-अप डोर हैंडल, लचीली या फोल्‍डेबल स्‍क्रीन, सिर्फ टचस्‍क्रीन कंट्रोल्‍स, जीरो ग्रेविटी सीट्स जैसे कुछ फीचर्स को बैन कर सकता है।

आ गया ड्रॉफ्ट

चीन में इस तरह के फीचर्स को बैन करने से पहले वहां की सरकार नागरिकों से भी राय जानना चाहती है। इसके लिए ही नए ड्रॉफ्ट को इंडस्ट्री और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री लाई है। इस ड्रॉफ्ट को मिनिस्‍ट्री के साथ 3 और एजेंसियों के साथ मिलकर लाया गया है। जिसमें लोगों की राय इन फीचर्स को बैन करने पर ली जा रही है। इस पर लोग अपनी राय 10 November तक दे सकते हैं।

जमा करने होंगे डॉक्‍यूमेंट्स

कार मेकर्स को चीन में नई कार को लॉन्‍च करने से पहले कई और चीजों को करना होगा। इनमें कारों के डिजाइन और उनके टेस्‍ट को कवर करने वाले जरूरी डॉक्‍यूमेंट्स शामिल होंगे। यह फैसला उन कारों पर लागू होगा, जिनके लिए कार मेकर 1 January 2027 या उसके बाद मंजूरी के लिए अप्‍लाई करेंगे। वहीं पुरानी कारों के लिए डॉक्‍यूमेंट्स जमा करने की समय सीमा को 1 July 2027 तक रखा गया है।

जमा नहीं करने पर होगी कार्रवाई

जो भी कार मेकर सरकार के इस फैसले के उलट डॉक्‍यूमेंट्स को जमा नहीं करवाएंगे, उनकी कारों में सुरक्षा को लेकर खतरा पाया जाएगा तो प्रोडक्‍शन रोकने के साथ ही उन कारों के लिए रिकॉल को जारी करने जैसी कार्रवाई को किया जाएगा।

कमजोर हो रही डिमांड

यह फैसला ऐसे समय पर आ रहा है जब चीन की कारों की डिमांड ग्‍लोबल लेवल पर कम हो रही है। चीन की पैसेंजर कार एसोसिएशन के हिसाब से सितंबर में रिटेल सेल की दर ईयर ऑन ईयर बेसिस पर 24% गिरी है। वहीं NEV सेगमेंट की कारों की सेल भी 12% कम होकर 1.141 मिलियन यूनिट ही रह गई है। इसके पीछे सुरक्षा कारण भी जिम्‍मेदार हो सकते हैं।

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