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माइक्रोसॉफ्ट का भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, हैदराबाद बना ग्लोबल साउथ के लिए नया रणनीतिक हब

माइक्रोसॉफ्ट ने हैदराबाद में अपने नए India South Central डेटासेंटर रीजन को लाइव करते हुए भारत में AI-रेडी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की घोषणा की है।

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच माइक्रोसॉफ्ट ने अपने क्लाउड और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े स्तर पर विस्तार देने की घोषणा की है। कंपनी ने हैदराबाद में अपने नए India South Central डेटासेंटर रीजन को लाइव करते हुए इसे एशिया और ग्लोबल साउथ के लिए रणनीतिक हब के तौर पर विकसित करने की योजना बताई है।

माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, भारत में उसके सभी डेटासेंटर रीजन अब AI वर्कलोड को सपोर्ट करने के लिए तैयार किए जा रहे हैं। इनमें AI-कैपेबल हार्डवेयर, हाई-एफिशिएंसी कूलिंग सिस्टम और एडवांस्ड AI वर्कलोड्स को चलाने के लिए जरूरी प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है।

हैदराबाद रीजन में थ्री-जोन आर्किटेक्चर

नया India South Central डेटासेंटर रीजन रेज़िलिएंट थ्री-ज़ोन आर्किटेक्चर पर आधारित है। इसे भविष्य में बढ़ती मांग के अनुसार विस्तार करने के लिए तैयार किया गया है। कंपनी ने कहा है कि आने वाले समय में इस रीजन में Azure और AI से जुड़ी अतिरिक्त सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

इस इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए भारत में पात्र संवेदनशील वर्कलोड्स को स्थानीय स्तर पर डिप्लॉय करने के लिए संगठनों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। इनमें सिक्योरिटी, कंप्लायंस और डेटा सॉवरेन्टी से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न कंट्रोल्स शामिल होंगे।

माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में अपने निवेश को लेकर US$20.5 बिलियन की प्रतिबद्धता जताई है। कंपनी के अनुसार, हैदराबाद का नया डेटासेंटर रीजन इस निवेश को ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अदाणी ग्रुप, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक और पीबी पे जैसे प्रमुख एंटरप्राइज और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर संगठन इस नए रीजन के लिए साइन अप कर चुके हैं।

2030 तक US$140-200 बिलियन के आर्थिक आउटपुट का अनुमान

माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि भारत में तेजी से बढ़ रहा डेटासेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर व्यापक आर्थिक गतिविधियों को गति दे सकता है। BCG की स्टडी के अनुसार, भारत का डेटासेंटर बिल्डआउट 2030 तक US$140-200 बिलियन का आर्थिक आउटपुट पैदा कर सकता है।

कंपनी के मुताबिक, हाइपरस्केल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, इंजीनियरिंग टैलेंट और तेजी से बढ़ती डिजिटल इकॉनमी भारत को AI और क्लाउड आधारित इनोवेशन के लिए महत्वपूर्ण बाजार बना रहे हैं।

एशिया और ग्लोबल साउथ पर फोकस

माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, India South Central रीजन का उद्देश्य सिर्फ भारत की घरेलू मांग को पूरा करना नहीं है। भारत में मौजूद हाइपरस्केल इंफ्रास्ट्रक्चर, इंजीनियरिंग क्षमता और विविध बाजारों के लिए टेक्नोलॉजी तैयार करने का अनुभव इसे दक्षिण एशिया और व्यापक एशियाई बाजारों के लिए भी उपयोगी बना सकता है।

यह रीजन Azure सर्विसेज के व्यापक पोर्टफोलियो के साथ लॉन्च हुआ है और भविष्य में Azure तथा AI सर्विसेज के पूरे पोर्टफोलियो को सपोर्ट करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसमें Microsoft Foundry भी शामिल है, जबकि आने वाले महीनों में अतिरिक्त क्षमताएं जोड़ी जाएंगी।

भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया तक हाई-कैपेसिटी कनेक्टिविटी

AI इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ माइक्रोसॉफ्ट रीजनल डिजिटल कनेक्टिविटी पर भी निवेश कर रहा है। कंपनी India-Southeast Asia (I-2SEA) submarine cable system में कंसोर्टियम पार्टनर के रूप में शामिल है।

प्रस्तावित 3,600 किलोमीटर का सबसी कॉरिडोर भारत, मलेशिया और सिंगापुर को जोड़ेगा। भारत में इसके मछलीपट्टनम और साउथ चेन्नई में ड्युअल लैंडिंग्स प्रस्तावित हैं। माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, इस सिस्टम से नेटवर्क रेज़िलिएंस बढ़ाने और AI, क्लाउड तथा हाइपरस्केल सेवाओं के लिए हाई-कैपेसिटी कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। केबल सिस्टम को 2029 में सर्विस के लिए तैयार करने का लक्ष्य है।

1 करोड़ से ज्यादा भारतीयों को AI स्किल्स

इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में AI स्किलिंग को लेकर भी प्रगति साझा की है। कंपनी के मुताबिक, Microsoft Elevate India के तहत अब तक 10 मिलियन से अधिक भारतीयों को AI स्किल्स दी जा चुकी हैं।

कंपनी ने 2030 तक 20 मिलियन लोगों को AI स्किल्स देने की प्रतिबद्धता जताई है। माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, लगभग 25 प्रतिशत लर्नर्स फाउंडेशनल AI कोर्स से आगे बढ़ चुके हैं और अतिरिक्त लर्निंग पाथवे के लिए क्रेडेंशियल हासिल कर चुके हैं।

इसके अलावा, Microsoft Data Center Academy के जरिए डेटासेंटर इंडस्ट्री के लिए युवाओं को तैयार किया जा रहा है। तेलंगाना सरकार की Young India Skills University (YISU) के सहयोग से चलने वाले इस प्रोग्राम में 600-घंटे का इंडस्ट्री-अलाइन्ड स्किलिंग प्रोग्राम शामिल है, जिसमें डेटासेंटर ऑपरेशंस और इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जाती है।

डेटा सॉवरेन्टी और कंप्लायंस पर जोर

India South Central रीजन माइक्रोसॉफ्ट के भारत में सॉवरेन पब्लिक क्लाउड फाउंडेशन को आगे बढ़ाता है। इसमें लोकल कैपेसिटी, डेटा रेजिडेंसी विकल्प, Availability Zones और गवर्नेंस क्षमताएं शामिल हैं।

कंपनी के अनुसार, भारत में उसके क्लाउड रीजन MeitY की गाइडलाइंस के अनुरूप क्षमताएं उपलब्ध कराते हैं और ग्राहकों को Digital Personal Data Protection (DPDP) Framework, RBI और CERT-In समेत संबंधित सेक्टर-स्पेसिफिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करते हैं। हालांकि, किसी संगठन और उसके वर्कलोड पर कौन-सी नियामकीय जरूरतें लागू होती हैं, इसका निर्धारण ग्राहक की जिम्मेदारी रहता है।

माइक्रोसॉफ्ट ने डिजिटल सॉवरेन्टी को वर्कलोड आधारित रिस्क डिसीजन के तौर पर बताया है। अलग-अलग वर्कलोड्स के लिए डेटा लोकेशन, कॉन्फिडेंशियलिटी, एन्क्रिप्शन कीज, ऑपरेशनल एक्सेस, गवर्नेंस और कंटिन्यूइटी के अलग-अलग स्तर के कंट्रोल की जरूरत हो सकती है।

India South Central में संबंधित सेवाएं उपलब्ध होने के साथ Azure Confidential Computing, Customer Lockbox और Azure Key Vault जैसी क्षमताएं ग्राहकों को डेटा सुरक्षा और एन्क्रिप्शन कीज पर नियंत्रण बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।

कूलिंग में पानी का इस्तेमाल प्रभावी रूप से शून्य

माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, India South Central डेटासेंटर रीजन जीरो-वाटर कूलिंग पर ऑपरेट करता है। हाई-एफिशिएंसी मैकेनिकल कूलिंग के जरिए कूलिंग के लिए पानी का इस्तेमाल प्रभावी रूप से शून्य रहता है।

कंपनी ने इसे 2030 तक कार्बन नेगेटिव, वाटर पॉजिटिव और जीरो वेस्ट बनने की अपनी वैश्विक प्रतिबद्धताओं से जोड़ा है।

हैदराबाद में माइक्रोसॉफ्ट अपने डेटासेंटर कम्युनिटी प्लेज के तहत स्थानीय संस्थानों, गैर-लाभकारी संगठनों और सरकार के साथ भी काम कर रहा है। कंपनी के अनुसार, स्थानीय स्तर पर ग्राउंडवॉटर रिचार्ज, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और वाटरशेड रेज़िलिएंस से जुड़े प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं।

Elikatta groundwater-recharge program के तहत जून 2026 तक करीब 5 मिलियन लीटर की रिचार्ज क्षमता जोड़ी जा चुकी है। कंपनी का कहना है कि इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पानी की सुरक्षा और समुदायों की दीर्घकालिक रेज़िलिएंस को मजबूत करना है।

माइक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट, Microsoft India and South Asia, पुनीत चंडोक के अनुसार, भारत में कंपनी की US$20.5 बिलियन की प्रतिबद्धता अब ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर में दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि AI के लिए केवल कंप्यूटिंग क्षमता पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षित, सस्टेनेबल और सॉवरेन-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ AI को पायलट से प्रोडक्शन तक ले जाने की क्षमता भी जरूरी है।

वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि India South Central डेटासेंटर रीजन भारत की AI क्षमता को मजबूत करने वाले डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करता है और डेवलपर्स, एंटरप्राइजेज तथा सार्वजनिक संस्थानों को AI बनाने और डिप्लॉय करने के लिए आधार उपलब्ध कराता है।

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