नई दिल्ली में बीते दिन यानी 12 अक्टूबर 2026 को जारी भरोसा टॉक्स इंडिया रिटायरमेंट इंडेक्स स्टडी (IRIS) 6.0 में महिलाओं की वित्तीय तैयारियों, निवेश की आदतों और रिटायरमेंट से जुड़ी उम्मीदों का आकलन किया गया है। एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस ने यह अध्ययन कांतार के साथ मिलकर किया है।
रिपोर्ट बताती है कि महिलाओं की वित्तीय तैयारी में सुधार हुआ है, लेकिन रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त रकम जुटाने और लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा बनाए रखने के मामले में अभी काफी गुंजाइश है।
महिलाओं का रिटायरमेंट इंडेक्स स्कोर पुरुषों के बराबर
आइरिस 6.0 के मुताबिक, महिलाओं का रिटायरमेंट इंडेक्स स्कोर 49 रहा, जो पुरुषों के स्कोर के बराबर है। महिलाओं का फाइनेंशियल प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स भी पिछले संस्करण के 50 से बढ़कर 52 हो गया। इससे पता चलता है कि रिटायरमेंट के लिए वित्तीय योजना बनाने की दिशा में महिलाओं की तैयारी बेहतर हुई है।
हालांकि, स्वास्थ्य और भावनात्मक तैयारी के स्कोर में मामूली गिरावट दर्ज की गई। महिलाओं का हेल्थ प्रिपेयर्डनेस स्कोर 47 से घटकर 46 रह गया, जबकि इमोशनल प्रिपेयर्डनेस स्कोर पिछले साल के 58 से घटकर 57 पर पहुंच गया।
रिटायरमेंट के लिए निवेश करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी
रिपोर्ट के अनुसार, रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू करने वाली महिलाओं का अनुपात आइरिस 5.0 में 65% था, जो आइरिस 6.0 में बढ़कर 71% हो गया। पुरुषों के मामले में भी यह आंकड़ा बढ़ा है, लेकिन उनकी वृद्धि तुलनात्मक रूप से कम रही। पुरुषों में रिटायरमेंट के लिए निवेश करने वालों का अनुपात 68% से बढ़कर 70% हो गया।
जल्दी आर्थिक आजादी हासिल करना भी महिलाओं के रिटायरमेंट लक्ष्यों में शामिल है। सर्वे में 69% महिलाओं ने कहा कि अगर उनकी वित्तीय जरूरतें पूरी हो जाएं, तो वे 58–60 वर्ष की पारंपरिक रिटायरमेंट उम्र से पहले काम छोड़ना चाहेंगी। इनमें से 45% महिलाएं 50 वर्ष की उम्र से पहले आर्थिक स्वतंत्रता के साथ रिटायर होना चाहती हैं।
रिटायरमेंट के लिए बचत की शुरुआत किस उम्र में करनी चाहिए?
रिपोर्ट में सामने आया कि 50% महिलाओं का मानना है कि कमाई शुरू करते ही रिटायरमेंट की योजना बनानी चाहिए। हालांकि, सक्रिय रूप से रिटायरमेंट के लिए बचत शुरू करने की आदर्श उम्र के बारे में महिलाओं ने औसतन 32 वर्ष बताया। पुरुषों ने इसके लिए 31 वर्ष को सही माना।
रिटायरमेंट के बाद मौजूदा लाइफस्टाइल बनाए रखने के लिए कितनी रकम की जरूरत होगी, इस बारे में 62% महिलाएं जागरूक हैं। आइरिस 5.0 में यह आंकड़ा 61% था। वहीं, पुरुषों में यह अनुपात पिछले संस्करण के 63% से घटकर 61% रह गया।
महिलाएं जुटा पाई हैं अपने रिटायरमेंट लक्ष्य का 26% फंड
निवेश शुरू करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ने के बावजूद, रिटायरमेंट के लिए तय लक्ष्य के मुकाबले अब तक जुटाई गई रकम कम है। महिलाओं के मुताबिक, वे अपने रिटायरमेंट फंड लक्ष्य का औसतन 26% हिस्सा जुटा चुकी हैं। पिछले संस्करण में यह आंकड़ा 25% था। इसके मुकाबले पुरुषों ने अपने लक्ष्य का औसतन 28% फंड जुटाने की बात कही।
लंबे समय तक बचत चलने को लेकर भी महिलाओं का भरोसा कम हुआ है। आइरिस 5.0 में 40% महिलाओं को उम्मीद थी कि उनका रिटायरमेंट फंड 10 साल से अधिक समय तक चलेगा। आइरिस 6.0 में यह अनुपात घटकर 30% रह गया। पुरुषों में भी यह आंकड़ा 36% से गिरकर 30% हो गया।
FD और RD में महिलाओं का ज्यादा भरोसा
रिटायरमेंट के लिए निवेश के विकल्प चुनने में महिलाएं अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले साधनों को प्राथमिकता दे रही हैं। सर्वे में 50% महिलाओं ने बताया कि उन्होंने रिटायरमेंट के लिए खास तौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या रिकरिंग डिपॉजिट (RD) में निवेश किया है। पुरुषों में ऐसा करने वालों का अनुपात 44% रहा।
दूसरी ओर, म्यूचुअल फंड, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF), सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP), स्टॉक, शेयर और कमोडिटी जैसे जोखिम आधारित निवेश विकल्पों में महिलाओं की भागीदारी कम है। रिटायरमेंट के लिए इन विकल्पों में निवेश करने वाली महिलाओं का अनुपात 27% रहा, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 34% है।
निवेश की जानकारी की कमी भी बड़ी बाधा
रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू नहीं कर पाने वाली महिलाओं के सामने सही जानकारी का अभाव एक प्रमुख समस्या है। सर्वे में 23% महिलाओं ने कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि निवेश कहां से शुरू करें या कितनी रकम बचानी चाहिए। पुरुषों में यह आंकड़ा 19% रहा।
ये आंकड़े संकेत देते हैं कि निवेश के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं को वित्तीय योजना, निवेश के विकल्पों और रिटायरमेंट के लिए जरूरी फंड का आकलन करने से जुड़ी जानकारी देना भी अहम है।
रिटायरमेंट के बाद स्वास्थ्य को लेकर महिलाएं आशावादी
स्वास्थ्य की तैयारी के इंडेक्स में मामूली गिरावट के बावजूद, 77% महिलाओं को उम्मीद है कि वे रिटायरमेंट के दौरान फिट और स्वस्थ रहेंगी। पुरुषों में ऐसा मानने वालों का अनुपात 74% है।
नियमित रूप से या कभी-कभी प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप कराने वाली महिलाओं का आंकड़ा 60% रहा, जबकि पुरुषों में यह 59% है। योग और ध्यान के मामले में भी महिलाएं आगे हैं। सर्वे के अनुसार, 50% महिलाएं योग या ध्यान करती हैं। पुरुषों में यह अनुपात 45% और राष्ट्रीय स्तर पर 46% है।
वहीं, 41% महिलाओं ने नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेने की बात कही। यह अनुपात पुरुषों और राष्ट्रीय औसत, दोनों के बराबर है।
परिवार के सहयोग की उम्मीद, लेकिन पर्यावरण को लेकर चिंता
भावनात्मक तैयारी के मामले में 84% महिलाओं को पूरा या कुछ हद तक भरोसा है कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें परिवार और दोस्तों से मदद मिलेगी। आइरिस 5.0 में यह आंकड़ा 86% था। पुरुषों में यह अनुपात पिछले संस्करण के 88% से घटकर 83% रह गया।
पर्यावरण में बदलाव भी महिलाओं की चिंताओं में शामिल है। सर्वे में 82% महिलाओं ने आशंका जताई कि पर्यावरण में हो रहे बदलाव रिटायरमेंट के बाद उनके शांतिपूर्ण जीवन को प्रभावित कर सकते हैं। पुरुषों में ऐसा मानने वालों का अनुपात 80% रहा।
एक्सिस मैक्स लाइफ के CEO ने क्या कहा?
एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के एमडी एवं सीईओ सुमित मदान के मुताबिक, आइरिस 6.0 के निष्कर्ष बताते हैं कि महिलाएं रिटायरमेंट की योजना बनाने के मामले में सकारात्मक बदलाव कर रही हैं। पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाएं FD और RD जैसे साधनों में निवेश कर रही हैं। साथ ही, वे जीवन के शुरुआती वर्षों में ही आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने का लक्ष्य रखती हैं।
उन्होंने कहा कि वित्तीय योजना बनाने की इच्छा को नियमित निवेश और सोच-समझकर लिए गए फैसलों में बदलना जरूरी है। समय पर निवेश शुरू करने और उसे लगातार जारी रखने से महिलाएं मजबूत रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकती हैं। इससे उन्हें भविष्य में वित्तीय आत्मविश्वास और अपनी शर्तों पर रिटायरमेंट लेने की आजादी मिल सकती है।
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