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भारत के Construction Equipment एक्सपोर्ट में 31.5% की जोरदार बढ़ोतरी, ICEMA को आगे भी बड़ी ग्रोथ की उम्मीद

भारत के Construction Equipment उद्योग के एक्सपोर्ट में 31.5% की वृद्धि हुई है और अब देश में बने करीब 20% उपकरण विदेशी बाजारों में भेजे जा रहे हैं। ICEMA के मुताबिक अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप जैसे विकसित बाजारों में भारतीय कंपनियों की बढ़ती पहुंच आने वाले वर्षों में एक्सपोर्ट ग्रोथ को और गति दे सकती है।

भारत का Construction Equipment उद्योग अब घरेलू बाजार के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। वित्त वर्ष 2026 में देश से Construction Equipment के एक्सपोर्ट में 31.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इंडियन Construction Equipment Manufacturers’ Association (ICEMA) के मुताबिक, इस तेज वृद्धि ने घरेलू बाजार में सुस्ती के बीच उद्योग को मजबूती देने का काम किया है।

ICEMA के प्रेसिडेंट और JCB India के CEO एवं मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक शेट्टी का कहना है कि भारतीय Construction Equipment की ग्लोबल मांग लगातार बढ़ रही है। अब देश के कुल Construction Equipment उत्पादन का करीब 20% हिस्सा एक्सपोर्ट किया जा रहा है। करीब पांच साल पहले यह हिस्सेदारी महज 2-3% थी।

केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी रहे चीफ गेस्ट

केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने कहा कि भारत का Construction Equipment उद्योग पहले ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है और अब देश के पास इसे एक बड़े ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब में बदलने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि सरकार की नई Construction & Infrastructure Equipment (CIE) Scheme से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, लोकलाइजेशन, इनोवेशन और सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने इंडस्ट्री से “Make in India, Make for the World” के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने और भारत को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान देने की अपील की।

पहली बार 1.40 लाख के करीब उत्पादन

भारतीय Construction Equipment इंडस्ट्री ने पिछले साल करीब 1,40,000 मशीनों का उत्पादन किया, जो इस क्षेत्र का अब तक का सबसे ऊंचा उत्पादन स्तर है। घरेलू Construction Equipment बाजार में पिछले साल ज्यादा बदलाव नहीं आया, लेकिन विदेशी बाजारों से मिली मांग ने इंडस्ट्री की ग्रोथ को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।

दीपक शेट्टी के मुताबिक, ग्लोबल मार्केट में भारतीय मशीनों को मिल रही स्वीकार्यता इस बात का संकेत है कि देश में तैयार किए जा रहे Construction Equipment की क्वालिटी, फीचर्स और टेक्नोलॉजी अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों की जरूरतों को पूरा कर रही है।

CEV Stage V Norms से बढ़ा एक्सपोर्ट का दायरा

भारत में CEV Stage V emission norms की ओर बढ़ना भी एक्सपोर्ट बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है। इन सख्त उत्सर्जन मानकों की वजह से शुरुआत में घरेलू उद्योग के सामने कुछ चुनौतियां आईं, लेकिन इसके साथ भारतीय कंपनियों के लिए विकसित देशों के बाजारों में प्रवेश के नए रास्ते भी खुले हैं।

ऑटो सेक्टर के कई दूसरे क्षेत्रों में भारत के एक्सपोर्ट का बड़ा हिस्सा अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे बाजारों में जाता है। इसके विपरीत Construction Equipment के मामले में भारतीय कंपनियां पहले से ही अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप जैसे विकसित बाजारों में अपनी जगह बना रही हैं।

जापान और कोरिया में भी पहुंच बनाने की उम्मीद

दीपक शेट्टी के अनुसार आने वाले वर्षों में भारत सिर्फ जापान और कोरिया से Construction Equipment मंगाने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय कंपनियां इन देशों को भी मशीनों का एक्सपोर्ट करने की स्थिति में आ सकती हैं। अमेरिका में Made-in-India Construction Equipment की बढ़ती मौजूदगी को भी उन्होंने भारतीय मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में बदलाव का संकेत बताया।

FTA और PLI Scheme से मिल सकता है अतिरिक्त फायदा

Developed economies के साथ Free Trade Agreements (FTA) भी Construction Equipment एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। ICEMA का मानना है कि ऐसे समझौतों से भारत में काम कर रही ग्लोबल कंपनियां स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ा सकती हैं और अपने भारतीय प्लांट्स को दूसरे देशों के लिए Export Hub के तौर पर इस्तेमाल कर सकती हैं।

इसके अलावा Construction Equipment के लिए प्रस्तावित Production-Linked Incentive (PLI) Scheme से भी पूरे इंडस्ट्री इकोसिस्टम को मजबूती मिलने की उम्मीद है। ICEMA इस योजना को लेकर सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रहा है और हाल में इससे जुड़े कुछ बिंदुओं पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।

Components की Local Manufacturing पर जोर

इंडस्ट्री के सामने एक बड़ी चुनौती इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और Chips की सप्लाई भी है। वर्तमान में Construction Equipment निर्माता कई जरूरी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए अमेरिका, ताइवान और मलेशिया जैसे देशों पर निर्भर हैं।

देश में इन महत्वपूर्ण Components का उत्पादन बढ़ने से सप्लाई ज्यादा स्थिर हो सकती है और भारतीय Construction Equipment कंपनियों की ग्लोबल प्रतिस्पर्धा क्षमता भी बेहतर हो सकती है।

बेहतर Logistics से घट रही लागत

भारत में सड़क और रेल कनेक्टिविटी में सुधार का फायदा Construction Equipment एक्सपोर्ट को भी मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर JCB की जयपुर फैक्ट्री को बेहतर Road और Rail Connectivity मिलने से मशीनों को JNPT तक पहुंचाने की लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौती कम हुई है।

JCB अब देशभर में छह स्थानों से मशीनों को ट्रेन के जरिए ट्रांसपोर्ट कर रही है। कंपनी के मुताबिक, रेल से मशीनों की ढुलाई की लागत सड़क परिवहन की तुलना में करीब एक-तिहाई रह जाती है। इसके साथ ही इससे CO2 emissions में भी कमी आती है।

सिर्फ सस्ता उत्पाद नहीं, बेहतर वैल्यू पर फोकस

भारतीय कंपनियों के एक्सपोर्ट बढ़ने के साथ दूसरे देशों के निर्माता कीमतों को लेकर ज्यादा आक्रामक रणनीति अपना सकते हैं। हालांकि ICEMA का मानना है कि भारतीय कंपनियों को केवल कम कीमत के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने से बचना चाहिए।

इंडस्ट्री के लिए आगे की रणनीति कम कीमत के बजाय Innovation, Technology और बेहतर Value देने पर केंद्रित होनी चाहिए। यही रणनीति भारतीय Construction Equipment को ग्लोबल मार्केट में लंबे समय तक मजबूत स्थिति दिला सकती है।

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