Infosys की परोपकारी और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) इकाई इंफोसिस फाउंडेशन का यह कार्यक्रम युवाओं को रोजगार के योग्य बनाने के साथ उनकी शिक्षा और नौकरी के बीच की दूरी कम करने पर केंद्रित है।
इसके तहत उद्योग की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण, रोजगार के नए अवसर और विभिन्न संगठनों के साथ साझेदारी के जरिए युवाओं को आजीविका से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रेजुएट और अंडरग्रेजुएट युवाओं को मिला फायदा
पिछले साल शुरू हुए इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड आजीविका कार्यक्रम ने 20 क्रियान्वयन साझेदारों के सहयोग से रोजगार के अवसर तैयार किए हैं। इनमें निर्माण ऑर्गनाइजेशन, आईसीटी एकेडमी, मैजिक बस, सेंटम फाउंडेशन और आगा खान रूरल सपोर्ट प्रोग्राम (इंडिया) जैसे संगठन शामिल हैं।
कार्यक्रम के तहत ग्रेजुएट युवाओं के लिए 1.17 लाख रोजगार के अवसर सृजित किए गए हैं, जबकि अंडरग्रेजुएट युवाओं के लिए यह आंकड़ा 96,000 से अधिक है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को उनकी शैक्षणिक योग्यता के साथ व्यावहारिक और उद्योग-आधारित कौशल प्रदान करना है, ताकि वे रोजगार के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
इस कार्यक्रम में समावेशिता पर भी जोर दिया गया है। इसके माध्यम से रोजगार के अवसर पाने वालों में 1.25 लाख से अधिक महिलाएं और 1,000 से ज्यादा दिव्यांगजन शामिल हैं। दिव्यांगजनों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से इंफोसिस फाउंडेशन एसोसिएशन ऑफ पीपुल विद डिसएबिलिटी (APD) के साथ काम कर रहा है। वहीं, रोजगार प्लेटफॉर्म के लिए असिसटेक फाउंडेशन (ATF) के साथ साझेदारी की गई है।
रोजगार के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर
इंफोसिस फाउंडेशन के ट्रस्टी सुमित विरमानी ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है, जब उससे लोगों को रोजगार मिलता है और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। उनके मुताबिक, 2.5 लाख रोजगार के अवसरों का आंकड़ा हासिल करना 2030 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
उन्होंने बताया कि जब युवाओं के प्रशिक्षण को उद्योग जगत की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाता है, तो रोजगार के बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। इसका प्रभाव केवल आजीविका तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे आर्थिक स्वतंत्रता, सामाजिक विकास और परिवारों के भविष्य को बेहतर बनाने के अवसर भी मिलते हैं।
विरमानी के अनुसार, फाउंडेशन भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास को बढ़ावा देने, समावेशी रोजगार के अवसर तैयार करने और अधिक से अधिक लोगों को भारत की विकास यात्रा में योगदान देने के लिए सक्षम बनाने पर काम कर रहा है।
साझेदार संगठनों ने भी बताया कार्यक्रम का महत्व
आईसीटी एकेडमी के सीईओ वी. श्रीकांत ने कहा कि इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड आजीविका कार्यक्रम यह दिखाता है कि रणनीतिक साझेदारियों के जरिए युवाओं के जीवन में लंबे समय तक सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास का वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब उससे स्थायी आजीविका और आर्थिक सशक्तीकरण के रास्ते खुलें।
उन्होंने बताया कि इस पहल के जरिए वंचित समुदायों और परिवार में पहली बार उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं को उद्योग के अनुरूप कौशल विकसित करने तथा अपनी डिजिटल क्षमताओं को मजबूत बनाने में मदद मिली है। इससे उन्हें करियर बनाने का आत्मविश्वास भी मिल रहा है।
श्रीकांत के मुताबिक, शिक्षा को रोजगार के वास्तविक अवसरों से जोड़ने के कारण यह कार्यक्रम युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने, अपने परिवारों का सहयोग करने और समाज के विकास में योगदान देने में मदद कर रहा है।
वहीं, निर्माण ऑर्गनाइजेशन के संस्थापक, चेयरपर्सन एवं ग्लोबल सीईओ मयूर पटनाला ने कहा कि भारत की युवा आबादी का पूरा लाभ उठाने के लिए उन्हें सही कौशल, अवसर और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड आजीविका कार्यक्रम युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के साथ उन्हें स्थायी आजीविका और करियर में दीर्घकालिक प्रगति के लिए तैयार करने का काम कर रहा है। इस पहल के जरिए वंचित वर्गों के युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित करने और उनमें कार्यबल का हिस्सा बनने का आत्मविश्वास विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
पटनाला के अनुसार, ऐसे प्रयासों से न केवल युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं, बल्कि परिवारों को मजबूती और देश को अधिक कुशल एवं समावेशी कार्यबल तैयार करने में भी मदद मिलती है।
2030 तक पांच लाख रोजगार के अवसरों का लक्ष्य
इंफोसिस फाउंडेशन की यह उपलब्धि उसके दीर्घकालिक रोजगार लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कार्यक्रम के तहत अब तक 2.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित किए जा चुके हैं, जबकि वर्ष 2030 तक पांच लाख अवसर तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित है।
प्रशिक्षण, रोजगार-केंद्रित साझेदारियों और महिलाओं तथा दिव्यांगजनों सहित विभिन्न वर्गों की भागीदारी पर जोर देते हुए यह पहल युवाओं को नौकरी के लिए तैयार करने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है।
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