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अजीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय ने ‘Realising Rights: A Handbook of Welfare in India’ का किया लोकार्पण, जानें क्या है बुक में खास

Azim Premji University launched Realising Rights: A Handbook of Welfare in India: ‘रियलाइजिंग राइट्स: ए हैंडबुक ऑफ वेलफेयर इन इंडिया’ प्रकाशित की गई। यह हैण्डबुक भारत की कल्याणकारी संरचना की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं का समग्र आकलन प्रस्तुत करती है।

Realising Rights: A Handbook of Welfare in India: भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी कल्याणकारी व्यवस्थाओं में से एक का निर्माण किया है। इसमें खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर केंद्रित तरह-तरह के कार्यक्रमों के जरिए देश की बड़ी आबादी को शामिल किया गया है।

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सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) तथा सामाजिक सुरक्षा ट्रान्सफर जैसी कल्याणकारी पहलों ने कोविड-19 महामारी के दौरान कमज़ोर और वंचित परिवारों को सुरक्षा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बुक लॉन्च की गई

अजीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय ने भारत की कल्याणकारी संरचना की विशेषताओं, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं को समझने और उनका आकलन करने के मकसद से ‘रियलाइजिंग राइट्स: ए हैंडबुक ऑफ वेलफेयर इन इंडिया’ प्रकाशित की है।

कुल 18 अध्यायों में लिखी गई यह हैण्डबुक सेंटर फॉर दी स्टडी ऑफ़ दी इंडियन इकॉनॉमी (CSIE) ने तैयार की है। इसके 27 लेखकों ने भारत की कल्याणकारी नीतियों और सार्वजनिक प्रणालियों का अधिकार-आधारित विश्लेषण किया है।

इस हैण्डबुक में शामिल क्या हैं मुख्य बातें?

• भारत के सामाजिक क्षेत्र पर होने वाले कुल सार्वजनिक खर्च का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 2008-09 के 23.6 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में घटकर 8.5 प्रतिशत रह गई है।
• इस हैण्डबुक में शामिल कल्याणकारी क्षेत्रों और योजनाओं पर केंद्र तथा राज्य सरकारें मिलकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 7 प्रतिशत तथा कुल सार्वजनिक खर्च का लगभग 21 प्रतिशत खर्च करती हैं।
• शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च अब भी जीडीपी के लगभग 4 प्रतिशत पर बना हुआ है, जबकि स्वास्थ्य पर सार्वजनिक खर्च जीडीपी के 2 प्रतिशत से भी कम है। यह दोनों क्षेत्र निर्धारित नीतिगत लक्ष्यों से कम हैं।
• अधिकार-आधारित पहलों की वजह से कल्याणकारी कार्यक्रमों का दायरा और इससे लाभ पाने वालों में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है।

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• सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद आंगनवाड़ी केंद्रों की संख्या 6 लाख से बढ़कर 14 लाख हो गई है।
• राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत रियायती दरों पर खाद्यान्न हासिल करने वालों की संख्या 36.3 करोड़ से बढ़कर 81 करोड़ से अधिक हो गई है।
• मनरेगा के तहत हर साल 200 से 300 करोड़ व्यक्ति-दिवस का रोज़गार निर्मित हुआ है। ख़ास बात यह है कि इसमें कुल रोज़गार का 55 प्रतिशत से भी ज़्यादा हिस्सा महिलाओं को मिला है।
• नकदी रकम ट्रांसफर कार्यक्रमों के तेज़ी से फैलाव ने कल्याणकारी सेवाओं की वितरण व्यवस्था को नया स्वरूप दिया है। इसके साथ ही बढ़ते डिजिटलीकरण की वजह से कइयों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और कई मामलों में जवाबदेही से जुड़ी नई चुनौतियाँ भी उभर रही हैं।
• मातृत्व लाभ, पोषण कार्यक्रमों, पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी कई प्रमुख कल्याणकारी योजनाएँ अब भी लोगों तक पहुंचने, फंडिंग और लागू करने से जुड़ी कमियों-ख़ामियों का सामना कर रही हैं।

अजीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय की प्रेसिडेंट इंदु प्रसाद ने कहा कि, “भारत का संविधान देश के हर एक नागरिक के लिए गरिमा, अवसर और न्याय सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। हमें आशा है कि यह हैण्डबुक इन सार्वजनिक विमर्शों को आगे बढ़ाएगी और ज़्यादा-से-ज़्यादा इंसाफ-पसंद तथा आगे भी सभी को साथ लेकर चलने वाला भारत बनाने के लिए मिल-जुल कर किए जाने वाली कोशिशों को मजबूत बनाएगी। साथ ही, यह ऐसे ‘विकसित भारत’ की उम्मीदों को आगे बढ़ाने में योगदान देगी, जो हर किसी को साथ लेकर आगे बढ़े।”

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सेंटर फॉर दी स्टडी ऑफ़ दी इंडियन इकॉनॉमी (CSIE), अजीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय के साथ जुड़ी हुई दीपा सिन्हा ने कहा है, “यह हैण्डबुक केंद्र सरकार की प्रमुख अधिकार-आधारित पहलों के विश्लेषण के ज़रिए भारत की कल्याणकारी व्यवस्था का एक व्यापक परिदृश्य प्रस्तुत करती है। हमें आशा है कि यह शिक्षाविदों, पत्रकारों, ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए एक उपयोगी संसाधन साबित होगी तथा शोध को व्यवहारिक कार्रवाई में बदलने में भी मददगार बनेगी।”

इस हैण्डबुक को ऑनलाइन पढ़ने के लिए आपको इस आधिकारिक लिंक https://azimpremjiuniversity.edu.in/publications/2026/book/realising-rights पर जाना होगा

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