ऑटोमोबाइल न्यूज़ डेस्क, नई दिल्ली। कुछ ड्राइवर पेट्रोल बचाने के चक्कर में ड्राइविंग के समय कार की विंडो खोल कर चलते हैं। गर्मी के मौसम के अलावा भी यह आदत हर तरह के मौसम में करने की कोशिश की जाती है। लेकिन इस तरह की बुरी आदत कानों को बड़ा नुकसान (window down driving ear damage) पहुंचाती है। ऐसा कैसे होता है। इस खबर में समझते हैं।
Ear Damage करती हैं कार की खुली विंडो
कार में जब विंडो खोल कर चलाया जाता है तो इससे कान खराब हो सकते हैं। कुछ एक्सपर्ट्स की मानें तो पेट्रोल और डीज़ल वाली कारें 85 डेसिबल तक शोर करती हैं। लेकिन जब कार की विंडो खुली होती हैं तो ये शोर 89 डेसिबल तक पहुंच सकता है। इसके अलावा अगर ट्रैफिक में कार चल रही हो तो विंडो खुली होने की वजह से 100 डेसिबल से भी ज्यादा का शोर हो जाता है। हाइवे या तेज़ स्पीड में यह शोर और ज्यादा हो सकता है।
कब होगा Ear Damage
एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर कोई व्यक्ति 85 डेसिबल तक के शोर में 8 घंटे तक रहता है तो उसे कुछ समय बाद सुनने में परेशानी (car wind noise health risks) आने लगती है।
वहीं 100 डेसिबल या उसके आस पास तक के शोर में कोई व्यक्ति सिर्फ 15 मिनट के लिए ही रह जाए तो भी कानों को नुकसान पहुंचना शुरू हो जाता है। लगातार इस तरह के शोर में कई महीनों तक रहने की वजह से कानों में परमानेंट नुकसान भी हो सकता है। जिससे सुनने की क्षमता हमेशा के लिए प्रभावित भी हो सकती है।
क्या है बचने का तरीका
कानों को होने वाले नुकसान की तो भरपाई होने में समय भी लगता है और कई बार कानों को ठीक करवाना काफी मुश्किल भी हो जाता है। इसलिए इससे बचाव ही ऐसा तरीका है जिससे कानों को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके लिए ड्राइविंग के समय विंडो बंद रखकर चलाना ही इकलौता और समझदारी भरा उपाय है, जिसे आदत बना लेना चाहिए। या फिर ज़रूरी हो तो हल्की सी विंडो खोलकर भी कार ड्राइव की जा सकती है।
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