Vehicle Scrapping: इंडियन रोड्स पर हर साल लाखों व्हीकल्स को रजिस्टर किया जाता है और उसी तरह कई हजार व्हीकल्स हर साल अपनी उम्र पूरी कर लेते हैं। उम्र पूरी कर चुके व्हीकल्स को सही तरह से स्क्रैप करना अभी भी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। लेकिन इसे आसान बनाया है Re Carma (री सस्टेनेबिलिटी लिमिटेड) ने। किस तरह यह इंडिया का सबसे बड़ा रिसाइक्लिंग नेटवर्क (recycling network) बना। इस रिपोर्ट में पढ़ते हैं।
इंडिया का बड़ा व्हीकल रिसाइक्लिंग नेटवर्क बना Re Carma
Re Carma इंडिया में व्हीकल रिसाइक्लिंग इंडस्ट्री का बड़ा नाम बन गया है। यह सबसे बड़े रिसाइक्लिंग नेटवर्क में से भी एक है।
कितनी है कैपेसिटी
इसके पास हर साल 30 हजार से ज्यादा व्हीकल्स को रिसाइकिल करने की कैपेसिटी भी है। जिनमें पैसेंजर कार, कमर्शियल व्हीकल्स, हैवी व्हीकल्स और अर्थ मूविंग उपकरण भी शामिल हैं।
दिल्ली-एनसीआर में है यूनिट
कंपनी के पास दिल्ली एनसीआर के पास हरियाणा के झज्जर में बड़ी यूनिट है जहां पर हर साल हजारों व्हीकल्स को रिसाइकिल किया जा सकता है। इसकी नेशनल कैपेसिटी 2 लाख मीट्रिक टन तक है। जिसमें यह प्लास्टिक, लौह, अलौह धातुओं, महत्वूपर्ण खनिज पदार्थ और कीमती धातुओं को पुराने हो चुके व्हीकल्स से अलग कर रिसाइक्लिंग के लिए यूज करने के लिए निकाल सकता है।
इंडिया में कितने है EoL व्हीकल्स
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में 20 साल से ज्यादा पुराने 5.1 मिलियन हल्के मोटर व्हीकल्स हैं, और 15 साल से ज्यादा पुराने 3.4 मिलियन व्हीकल्स हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का अनुमान है कि 2025 तक, देश भर में 20 मिलियन से ज्यादा व्हीकल्स जीवन-काल (EoL) तक पहुँच जाएँगे।
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