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IFQM Symposium 2026: MSMEs के लिए क्वालिटी को आदत और बिजनेस का हिस्सा बनाने पर जोर

IFQM Symposium 2026 के दूसरे दिन MSMEs में क्वालिटी, इनोवेशन, AI और स्किलिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। उद्योग जगत ने कहा कि भारत को ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए क्वालिटी को डिजाइन से डिलीवरी तक कारोबार का हिस्सा बनाना होगा।

भारत को ग्लोबल स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए केवल उत्पादन और कारोबार का विस्तार पर्याप्त नहीं है, बल्कि कंपनियों को अपने कामकाज के हर चरण में क्वालिटी को शामिल करना होगा। खासतौर पर MSMEs को डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग से लेकर डिलीवरी तक गुणवत्ता आधारित प्रक्रियाओं को तेजी से अपनाने की जरूरत है। यह बात IFQM Symposium 2026 के दूसरे दिन चर्चा का प्रमुख केंद्र रही।

नई दिल्ली में आयोजित तीसरे IFQM Symposium के Day 2 में MSMEs की क्षमताओं को मजबूत करने, इंडस्ट्री और एकेडमिया के बीच सहयोग बढ़ाने, नई प्रतिभाओं को तैयार करने तथा टेक्नोलॉजी के जरिए उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने पर चर्चा हुई। IFQM ने MSMEs के लिए एक लीडरशिप प्रोग्राम शुरू करने की योजना भी बताई है।

इसके बाद इसी तरह का कार्यक्रम बड़ी इंडस्ट्री के लिए भी शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य बेस्ट प्रैक्टिस साझा करना, वेस्ट कम करना, क्वालिटी सुधारना और लगातार सीखने के जरिए इनोवेशन को बढ़ावा देना है।

एविएशन सेक्टर में मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की जरूरत

कार्यक्रम में “Wings of Viksit Bharat: Transforming India into a Global Aviation Hub” विषय पर मुख्य भाषण देते हुए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू ने भारत में मजबूत एविएशन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि सरकार का अंतिम लक्ष्य भारत में एयरक्राफ्ट बनाना है और एविएशन सेक्टर, खासकर MRO के लिए नीतिगत सहयोग दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक 350 एयरपोर्ट का लक्ष्य रखा है और सरकार इसे हासिल करने की दिशा में काम कर रही है।

मंत्री ने कहा कि एविएशन मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए मटेरियल क्वालिटी, स्किलिंग, लोगों और इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स पर ध्यान देना होगा। डिजाइन से लेकर फैक्ट्री फ्लोर तक स्किलिंग जरूरी है। उन्होंने Boeing और Airbus जैसी ग्लोबल OEM कंपनियों से भी भारतीय MSMEs और सप्लाई-चेन पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया, ताकि भारतीय कंपनियों को ग्लोबल क्वालिटी और प्रोडक्ट स्पेसिफिकेशन की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

Quality को नेतृत्व की जिम्मेदारी बनाने पर जोर

IFQM के चेयरमैन श्री वेणु श्रीनिवासन ने कहा कि क्वालिटी केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे नेतृत्व और पूरी संस्था की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता बनना चाहिए। उनके मुताबिक बदलाव ऊपर से शुरू होता है और वर्ल्ड-क्लास कंपनी बनाने के लिए लगातार इनोवेशन, स्टैंडर्ड का पालन, गलतियों से सीखने और रोजाना अनुशासन की जरूरत है।

उन्होंने MSMEs को देश की अर्थव्यवस्था की नींव बताते हुए कहा कि IFQM का लक्ष्य 5,000 MSMEs को क्वालिटी और इनोवेशन से जोड़कर इसे देशव्यापी आंदोलन बनाना है।

IFQM के CEO और Director श्री सौमित्र भट्टाचार्य ने बताया कि संगठन ने पहले 200+ MSMEs के साथ काम किया है और अब लक्ष्य 500+, इसके बाद 1,000+ MSMEs तक पहुंचने का है। उन्होंने सदस्यों और गैर-सदस्यों को भी इस बदलाव में force multipliers के रूप में इस्तेमाल करने की जरूरत बताई।

Industry-Academia Collaboration और MSME Transformation

Tata Steel के CEO एवं Managing Director टी.वी. नरेंद्रन ने कहा कि क्वालिटी के लिए momentum, critical mass और सही mindset तैयार करना जरूरी है। उन्होंने MSME ecosystem में industry-academia collaboration को वास्तविक रूप से लागू करने पर जोर दिया।

वहीं TVS Motor Company के Director & CEO के.एन. राधाकृष्णन ने MSMEs को process-driven organisations में बदलने की आवश्यकता बताई। उन्होंने TVS Motors द्वारा release किए गए 132 MSMEs को अगले 90 दिनों में transform करने का उदाहरण दिया और CEO connect sessions को और मजबूत करने की बात कही।

AI से MSMEs को मिल सकता है Force Multiplier

Symposium में AI को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। Tata Technologies के MD & CEO गिरीश कृष्णमूर्ति की अध्यक्षता वाले पैनल में Myelin Foundry के Founder & CEO डॉ. गोपीचंद कटरागड्डा और KIT/GAMI के General Manager डॉ. लुकास ब्रेट्ज शामिल हुए।

चर्चा में Core AI और Operational AI के बीच अंतर पर बात हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि AI को सिर्फ टेक्नोलॉजी अपग्रेड के तौर पर नहीं, बल्कि पूरे operating model को बेहतर बनाने वाले अवसर के रूप में देखना चाहिए। हालांकि MSMEs के सामने AI अपनाने में कई बाधाएं हैं। ऐसे में IFQM की ओर से ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करने की जरूरत बताई गई जो MSMEs के लिए AI solutions को चुनकर, validate करके और आसान तरीके से उपलब्ध करा सके।

Global Partnerships पर भी फोकस

JUSE के Managing Director मसाटो ओनोडेरा ने “Strengthening Partnerships Globally: IFQM and JUSE Collaboration” विषय पर कहा कि भारत और जापान के बीच knowledge और experience का दोतरफा आदान-प्रदान दोनों देशों के लिए उपयोगी होगा।

दो दिनों के इस Symposium में करीब 50 CEOs, 200 CXOs और कुल 400 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें सरकार, इंडस्ट्री, एकेडमिया, ग्लोबल क्वालिटी संस्थानों और MSMEs से जुड़े प्रतिनिधि, शिक्षाविद और छात्र शामिल रहे।

कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि भारत को केवल scale नहीं, बल्कि excellence की ओर बढ़ना होगा। MSMEs को सही skills, technology, partnerships और quality processes देकर ही उन्हें global supply chains का मजबूत हिस्सा बनाया जा सकता है। IFQM ने इस बात पर जोर दिया कि Viksit Bharat की दिशा में क्वालिटी केवल एक metric या process नहीं, बल्कि leadership commitment और रोजमर्रा के काम करने की संस्कृति बननी चाहिए।

Parth Gupta
Parth Guptahttps://autotechbiz.in/
Parth Gupta ATB (Autotechbiz.in) में सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। कार, बाइक और स्‍कूटर के साथ आफ्टर मार्केट प्रोडक्‍ट्स और एक्‍सेसरीज का टेक्‍स्‍ट और वीडियो में रिव्‍यू भी करते हैं। खाली समय में पार्थ को घूमने, पढ़ने का शौक है।
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