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भारत में 30 साल का सफर: सैमसंग ने कारोबार के साथ मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट को भी दी रफ्तार

भारत में 30 साल पूरे करने के दौरान सैमसंग ने अपने कारोबार के साथ मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च, इनोवेशन और कौशल विकास के क्षेत्र में भी विस्तार किया है। नोएडा और चेन्नई की फैक्ट्रियों से लेकर R&D सेंटर और युवाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक, कंपनी का फोकस भारत में क्षमताएं विकसित करने पर रहा है।

भारत में कारोबार शुरू करने के तीन दशक पूरे कर चुकी सैमसंग अब खुद को केवल एक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी के तौर पर नहीं देखती। 1995 में भारत में कदम रखने के बाद कंपनी ने यहां अपने कारोबार का विस्तार करने के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च, इनोवेशन, रोजगार और स्किल डेवलपमेंट से जुड़े क्षेत्रों में भी निवेश किया है। कंपनी के मुताबिक, उसके सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिए अब तक 15 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई जा चुकी है।

6 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: भारत पिछले 30 वर्षों में तेजी से बदलने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सैमसंग का कहना है कि इस बदलाव के दौरान भारत में किए गए उसके निवेश ने देश में तकनीक और औद्योगिक क्षमताओं को मजबूत करने में भूमिका निभाई है।

सैमसंग दक्षिण-पश्चिम एशिया के प्रेसिडेंट एवं सीईओ जेबी पार्क के अनुसार, तीन दशक पहले भारत में आने वाली कई वैश्विक कंपनियों के लिए यहां का बड़ा बाजार प्रमुख आकर्षण था। सैमसंग ने इसके साथ-साथ भारत की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा और इसी आधार पर देश में अपना कारोबार और निवेश बढ़ाया।

नोएडा और चेन्नई बने मैन्युफैक्चरिंग हब

भारत में सैमसंग की यात्रा में मैन्युफैक्चरिंग की अहम भूमिका रही है। कंपनी ने नोएडा और चेन्नई में अपनी उत्पादन सुविधाएं स्थापित की हैं। नोएडा स्थित प्लांट दुनिया की सबसे बड़ी स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं में शामिल है और इसे एक महत्वपूर्ण निर्यात केंद्र के रूप में भी विकसित किया गया है।

चेन्नई की फैक्ट्री के साथ मिलकर ये दोनों केंद्र भारत में सैमसंग की उत्पादन क्षमता को मजबूत करते हैं। कंपनी अब कंपोनेंट इकोसिस्टम को भी विस्तार देने पर काम कर रही है। इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन के भीतर उसकी स्थानीय गतिविधियों का दायरा और बढ़ने की संभावना है।

भारत में रिसर्च और डिजाइन पर भी जोर

सैमसंग का भारत में योगदान केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। कंपनी के यहां तीन R&D केंद्र और एक डिजाइन सेंटर मौजूद हैं। कंपनी ने भारत में 14,000 से अधिक पेटेंट भी दाखिल किए हैं।

इन रिसर्च और डिजाइन सुविधाओं के जरिए भारतीय इंजीनियर और शोधकर्ता ऐसे उत्पादों और तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल भारत के अलावा दुनिया के दूसरे बाजारों में भी किया जाता है।

भारत की बड़ी और विविध आबादी कंपनी के लिए तकनीक को ज्यादा सहज और समावेशी बनाने की चुनौती भी पेश करती है। अलग-अलग भाषाओं, क्षमताओं और डिजिटल तकनीक के अनुभव वाले 1.4 अरब लोगों के लिए समाधान तैयार करना नए तरह के इनोवेशन की जरूरत पैदा करता है। सैमसंग के मुताबिक, भारत में इन जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए कई समाधान दूसरे देशों के उपभोक्ताओं के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।

जेबी पार्क ने कहा कि कंपनी अब भारत में सिर्फ तकनीक लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के साथ मिलकर तकनीक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

युवाओं की स्किलिंग पर बड़ा फोकस

सैमसंग के ‘Together for Tomorrow. Enabling People’ विजन के तहत कंपनी ने शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, वर्कप्लेस एक्सपीरियंस और युवा इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में कई कार्यक्रम शुरू किए हैं।

सैमसंग इनोवेशन कैंपस के तहत अब तक 26,500 से अधिक युवाओं को AI, बिग डेटा, IoT और कोडिंग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया है। भारत में 2022 में इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी और केवल पिछले साल करीब 20,000 युवाओं को ट्रेनिंग दी गई। इनमें लगभग आधी महिलाएं थीं।

इसके अलावा DOST के विस्तारित सेल्स प्रोग्राम के जरिए वंचित समुदायों के 13,000 युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें क्लासरूम ट्रेनिंग के साथ रिटेल स्टोर्स में पांच महीने का भुगतान वाला वर्कप्लेस प्रशिक्षण भी शामिल है।

स्कूलों में भी पहुंचा डिजिटल और STEM एजुकेशन

सैमसंग का स्किल डेवलपमेंट फोकस स्कूली स्तर पर भी दिखाई देता है। तमिलनाडु के कांचीपुरम और रानीपेट जिलों के 10 सरकारी स्कूलों में DigiArivu कार्यक्रम के जरिए 3,000 छात्रों तक पहुंच बनाई जा रही है। इसमें STEM लैब, डिजिटल लर्निंग और शिक्षकों के विकास से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं।

छोटे शहरों से सामने आ रही नई प्रतिभा

सैमसंग के Solve for Tomorrow कार्यक्रम में इस साल देश के छोटे शहरों और कस्बों से भी बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी देखने को मिली। इस साल प्रतियोगिता के लिए 648 शहरों से आवेदन मिले और 135 शहरों में 184 डिजाइन-थिंकिंग वर्कशॉप आयोजित की गईं।

प्रतियोगिता की 20 फाइनलिस्ट टीमों में आधे से अधिक ओडिशा के सुंदरगढ़, आंध्र प्रदेश के चित्तूर और उत्तर प्रदेश के रायबरेली जैसे शहरों से हैं। इनमें से पांच टीमें ‘AI Living for India’ थीम पर आधारित समाधान तैयार कर रही हैं।

इन सभी टीमों को IIT दिल्ली और सैमसंग के रिसर्च सेंटरों के मेंटर्स का मार्गदर्शन मिल रहा है। अक्टूबर में होने वाले फिनाले से पहले उन्हें अपने समाधान को आगे विकसित करने के लिए सहायता दी जा रही है। प्रतियोगिता में 2 करोड़ रुपये के इनक्यूबेशन ग्रांट उपलब्ध कराए जाएंगे।

जेबी पार्क के मुताबिक, कंपनी के लिए लोगों में निवेश करना केवल परोपकार से जुड़ा कदम नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण का हिस्सा है।

यही वजह है कि सैमसंग के कार्यक्रमों में युवाओं को केवल प्रशिक्षण देने के बजाय उन्हें रिसर्चर्स से जुड़ने, प्रोटोटाइप बनाने और इनक्यूबेशन जैसी सुविधाओं तक पहुंच देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

कुल मिलाकर, भारत में सैमसंग के 30 साल का सफर केवल कारोबार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कहानी नहीं है। कंपनी ने मैन्युफैक्चरिंग के साथ रिसर्च, डिजाइन, शिक्षा, कौशल विकास और युवा इनोवेशन के क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी का विस्तार किया है।

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