जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2027: 20वें संस्करण के लिए दूसरी सूची जारी, कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियां होंगी शामिल

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 20वें संस्करण का आयोजन 14 से 18 जनवरी 2027 तक जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में होगा
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 20वें संस्करण का आयोजन 14 से 18 जनवरी 2027 तक जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में होगा

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल अपने 20वें संस्करण के साथ साहित्य, इतिहास, विज्ञान और संस्कृति से जुड़े वैश्विक विचारकों को एक मंच पर लाने की तैयारी कर रहा है। इसी कड़ी में वेदांता प्रस्तुत इस महोत्सव के आयोजकों ने वक्ताओं की दूसरी सूची जारी की है। पांच दिन तक चलने वाला यह आयोजन 14 से 18 जनवरी 2027 तक जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित किया जाएगा।

फेस्टिवल की नई सूची में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके लेखक, पुरस्कार विजेता इतिहासकार, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, कलाकार, पत्रकार और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी हस्तियां शामिल हैं। इस बार भी साहित्यिक चर्चाओं के साथ-साथ सभ्यताओं के इतिहास, राजनीति, सामाजिक पहचान, स्वास्थ्य, खानपान, कला और वैज्ञानिक खोजों जैसे विषयों पर विचार-विमर्श देखने को मिलेगा।

साहित्य और इतिहास की दुनिया के प्रमुख नाम

वक्ताओं की दूसरी सूची में फलस्तीनी लेखिका अदानिया शिबली का नाम शामिल है। उनका उपन्यास माइनर डिटेल नेशनल बुक अवॉर्ड और इंटरनेशनल बुकर प्राइज के लिए नामांकित हुआ था। मानव विकास और पुरातत्व के क्षेत्र में अपने कार्यों के लिए पहचानी जाने वाली जैविक मानवविज्ञानी, लेखिका और प्रसारक एलिस रॉबर्ट्स भी इस आयोजन का हिस्सा होंगी।

भारतीय बौद्धिक इतिहास और राजनीतिक चिंतन पर शोध करने वाली अनन्या वाजपेयी के साथ पुलित्जर पुरस्कार विजेता जीवनीकार बेंजामिन मोजर भी फेस्टिवल में शामिल होंगे। हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और इतिहासकार कैरोलीन एल्किंस भी वक्ताओं में हैं। उनका शोध ब्रिटिश ‘उदार साम्राज्यवाद’ की अवधारणा की आलोचनात्मक पड़ताल करता है। वहीं, पहचान, रिश्तों और आधुनिक जीवन से जुड़े विषयों पर लेखन करने वाली उपन्यासकार क्लेयर मेसुड भी अपने विचार साझा करेंगी।

प्राचीन भूमध्यसागरीय क्षेत्र और निकट पूर्व के इतिहास पर काम करने वाले पुरातत्वविद एवं इतिहासकार एरिक क्लाइन, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और संघर्ष समाधान की विशेषज्ञ गैब्रिएल रिफकिंड तथा आदिवासी पहचान को अपने कथा साहित्य में स्थान देने वाले लेखक हंसदा सोवेंद्र शेखर भी इस सूची में शामिल हैं।

इसके अलावा, मराठी नाटककार, उपन्यासकार और रंगमंच निर्देशक मकरंद साठे, शास्त्रीय साहित्य पर अकादमिक कार्य करने वाली मीरा सियो और पहचान, परिवार तथा अपनेपन जैसे विषयों पर लिखने वाली कवयित्री एवं उपन्यासकार मोना अर्शी भी फेस्टिवल में हिस्सा लेंगी।

कला और सांस्कृतिक इतिहास पर चर्चा के लिए ब्रिटिश म्यूजियम के पूर्व निदेशक एवं प्रसिद्ध कला इतिहासकार नील मैकग्रेगर उपस्थित रहेंगे। मलयालम के प्रतिष्ठित लेखक और निबंधकार पॉल जकारिया भी इस आयोजन में शामिल होंगे। उनके साहित्य में सामाजिक टिप्पणी, व्यंग्य और दार्शनिक विचारों के साथ कथा लेखन का मेल देखने को मिलता है।

विज्ञान, स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा

इस संस्करण में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के विचार भी सुनने को मिलेंगे। शेफ और रेस्तरां व्यवसायी रितु डालमिया, लोकप्रिय इटैलियन रेस्तरां दिवा की सह-मालकिन, भी वक्ताओं की दूसरी सूची का हिस्सा हैं।

व्यक्तिगत विकास पर लेखन और कोचिंग के लिए जानी जाने वाली रॉक्सी नफूसी तथा स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा जागरूकता से जुड़े कार्यों के लिए पहचाने जाने वाले कार्डियोवस्कुलर सर्जन श्रीराम नेने भी फेस्टिवल में शामिल होंगे।

नोबेल पुरस्कार विजेता आनुवंशिकीविद और कोशिका जीवविज्ञानी सर पॉल नर्स विज्ञान से जुड़े अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। वहीं, कास्ट मैटर्स के लेखक सूरज येंगडे जाति, नस्ल और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे।

पूंजीवाद और वैश्विक आर्थिक इतिहास पर शोध करने वाले हार्वर्ड विश्वविद्यालय के इतिहासकार स्वेन बेकर्ट भी वक्ताओं में शामिल हैं। इनके साथ प्रवासन, पहचान और सांस्कृतिक मेलजोल पर लिखने वाले उपन्यासकार, कवि एवं आलोचक ताबिश खैर तथा लेखिका और भाषाविद थांगजाम हिंदुस्तानी देवी भी इस आयोजन में हिस्सा लेंगी।

सार्वजनिक जीवन, पत्रकारिता और कला जगत की हस्तियां

दूसरी सूची में व्यापार, परोपकार और सामाजिक प्रभाव के क्षेत्र में सक्रिय अक्षता मूर्ति का नाम भी है। प्रतिष्ठित पत्रकार, प्रसारक और लेखिका मिशाल हुसैन तथा एशियाई कला, संग्रहालयों और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर काम करने वाली कला इतिहासकार विशाखा एन. देसाई भी फेस्टिवल में शामिल होंगी।

आयोजकों के मुताबिक, वक्ताओं की यह सूची साहित्य और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को एक साथ लाने के उद्देश्य को आगे बढ़ाती है। इसमें स्थापित लेखकों और विचारकों के साथ ऐसे व्यक्तित्व भी शामिल हैं, जिनका काम समकालीन सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक बहसों से जुड़ा है।

संजय के. रॉय ने क्या कहा?

टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक संजय के. रॉय ने कहा कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 20वें संस्करण में उन आवाजों, विचारों और दृष्टिकोणों को महत्व दिया जा रहा है, जिन्होंने पिछले दो दशकों में इस आयोजन को पहचान दिलाई है।

उन्होंने साहित्य, इतिहास, विज्ञान, दर्शन, भू-राजनीति और कला को फेस्टिवल की बौद्धिक यात्रा के महत्वपूर्ण हिस्से बताया। उनके अनुसार, ऐसे समय में जब दुनिया को सार्थक संवाद के मंचों की अधिक जरूरत है, विभिन्न संस्कृतियों, विषयों और महाद्वीपों के लोगों को एक साथ लाना महत्वपूर्ण है। फेस्टिवल का उद्देश्य स्थापित मान्यताओं पर सवाल उठाने, विचारों का दायरा बढ़ाने और साझा मानवीय अनुभवों को समझने के अवसर उपलब्ध कराना है।

विलियम डेलरिम्पल और नमिता गोखले ने भी साझा किए विचार

इतिहासकार, लेखक और फेस्टिवल के सह-निदेशक विलियम डेलरिम्पल ने कहा कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की शुरुआत के समय इसके इतने व्यापक स्वरूप की कल्पना करना मुश्किल था। उन्होंने भारत की कहानी कहने, बौद्धिक आदान-प्रदान और सार्वजनिक बहस की प्राचीन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन ने भारतीय बौद्धिक परंपराओं को वैश्विक विमर्श से जोड़ने में योगदान दिया है।

उन्होंने पिछले दो दशकों में भारत और दुनिया के लेखकों, इतिहासकारों तथा विचारकों को जयपुर में एक साथ आते देखने को उल्लेखनीय अनुभव बताया। उनके अनुसार, फेस्टिवल के सामने अब भी नई कहानियों को खोजने, इतिहास को नए नजरिए से समझने और विभिन्न विचारों पर बहस करने की व्यापक संभावनाएं हैं।

फेस्टिवल की सह-संस्थापक, सह-निदेशक और लेखिका नमिता गोखले ने किताबों को विविध दुनिया को समझने का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि 20वां संस्करण नए विचारों, बदलती तकनीकों और दुनिया को देखने के नए नजरियों के लिए खुला रहेगा, साथ ही शास्त्रीय और कालजयी परंपराओं से भी जुड़ा रहेगा।

नमिता गोखले के मुताबिक, इस ऐतिहासिक संस्करण में भारत के बहुभाषी साहित्यिक परिदृश्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। देश की प्रमुख भारतीय भाषाओं के लेखक अलग-अलग सत्रों, परिचर्चाओं और साहित्यिक पाठ कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

20वें संस्करण में क्या रहेगा खास?

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल पिछले दो दशकों में लेखकों, पाठकों और विचारकों के बीच संवाद का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच बना है। इसका 20वां संस्करण साहित्यिक परंपराओं और समकालीन विचारों के बीच संबंधों को सामने लाने पर केंद्रित रहेगा।

आयोजकों की ओर से जारी दूसरी सूची इस बात को रेखांकित करती है कि फेस्टिवल में विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और विषयों से जुड़ी आवाजों को स्थान दिया जाएगा। साहित्य, इतिहास, विज्ञान, कला और सामाजिक विमर्श के मेल के जरिए यहां ऐसे संवादों को बढ़ावा देने की योजना है, जो पाठकों को नए दृष्टिकोणों से परिचित कराएं।

14 से 18 जनवरी 2027 तक आयोजित होने वाला यह महोत्सव अपने 20वें संस्करण में एक बार फिर पुस्तकों, विचारों और बहसों के जरिए विविध विषयों को एक मंच पर लाएगा।