Car Coating Guide: सिरेमिक कोटिंग क्‍या होती है? क्‍या होती है कार के लिए फायदेमंद

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ऑटोमोबाइल न्‍यूज़ डेस्‍क, नई दिल्‍ली। शोरूम से जब नई कार खरीदकर घर लाते हैं तो कुछ टाइम तक उसकी चमक एक जैसी रहती है। लेकिन धीरे धीरे उसकी चमक गायब होने लगती है और ऐसा तब होता है जब कार के पेंट पर धूप, पानी, धूल की मार पड़ती है। इससे बचने के लिए लोग सिरेमिक और टेफ्लॉन कोटिंग का सहारा लेते हैं। ये कोटिंग क्‍या होती हैं और क्‍या सही में इनसे कार के पेंट को फेड होने से बचाने में मदद (Car Coating Guide) मिलती है।

क्‍या है सिरेमिक कोटिंग?

सिरेमिक कोटिंग की लिक्‍विड पॉलिमर होती है। जिसे कार के एक्‍सटीरियर में पेंट के ऊपर लगाया जाता है। एक बार इसे लगाया जाए तो फिर यह ऐसी परत बना देती है जिससे लंबे समय तक पेंट को नए जैसा रखने में मदद मिलती है।

होता है नैनो टेक्‍नोलॉजी का यूज़

सिरेमिक कोटिंग अप्‍लाई करते हुए इसमें नैनो टेक्‍नोलॉजी का यूज़ किया जाता है। इस तरह की टेक्‍नोलॉजी के यूज़ से एक हाइड्रोफोबिक परत बन जाती है जो न सिर्फ पेंट को सुरक्षित बनाए रखती है, बल्कि पेंट को नए जैसी चमक भी देती है। इसकी मोटाई 2 से 3 माइक्रोन तक होती है।

क्‍या हैं फायदे

सिरेमिक कोटिंग के फायदे यह होते हैं कि यह कार को धूप के साथ आने वाली UV रेज़ से बचाती हैं। इसके साथ ही इसकी वजह से कार के पेंट को धूल मिट्टी, प्रदूषण से भी बचाया जा सकता है।

कितनी है उम्र

किसी अच्‍छी जगह से सिरेमिक कोटिंग को करवाया जाए तो फिर इसकी उम्र 5 साल के आस-पास हो सकती है। साथ ही इसका ध्‍यान रखा जाए तो फिर इसको 5 साल से भी ज्‍यादा समय तक चलाया जा सकता है।

कोटिंग के नुकसान भी हैं

सिरेमिक कोटिंग के फायदे तो हैं ही, इसके कुछ नुकसान भी हैं। अन्‍य किसी भी तरह की कोटिंग के मुकाबले यह थोड़ी महंगी होती है। इसलिए कम लोग ही इसको अपनी कार पर करवाते हैं। इस तरह की कोटिंग को करवाने से पहले पेंट को अच्‍छी तरह से साफ किया जाता है, जिसमें ज्‍यादा समय लगता है। अगर किसी वजह से यह खराब हो जाए तो फिर उसे ठीक करने में भी ज्‍यादा खर्च होता है।