Cafe-3 Norms: 2027 से इंडिया में हो सकता है लागू, क्‍या होगा Automobile Industry पर असर

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Cafe-3 Norms को इंडिया में अगले साल से लागू किया जा सकता है। अगर इस नॉर्म्‍स को देश में लागू कर दिया जाता है, तो क्‍या Automobile Industry पर अच्‍छा असर होगा, या फिर इससे परेशानी होगी? इस रिपोर्ट में पढ़ते हैं।

Cafe-3 Norms होंगे लागू

इंडिया में 2027 से कैफे-3 नॉर्म्‍स को लागू किया जा सकता है। जिसके बाद ऑटोमोबाइल इंडस्‍ट्री में कई बड़े बदलाव हो सकते हैं और इसका असर कस्‍टमर्स के साथ ही एनवायरमेंट पर होगा।

क्‍या है नॉर्म्‍स

कैफे-3 नॉर्म्‍स की फुल फॉर्म कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी है, जिसको पैसेंजर व्‍हीकल्‍स की फ्यूल एफिशिएंसी को बढ़ाने के लिए लाया जाएगा। इसको लागू करने का मुख्‍य उद्देश्‍य पैसेंजर व्‍हीकल्‍स से निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्‍साइड को कम करना है।

क्‍यों है जरूरी

कैफे-3 नॉर्म्‍स को लाना इसलिए भी जरूरी है क्‍योंकि इससे सभी कंपनियों की कारों का एवरेज कार्बन उत्‍सर्जन देखा जाता है। अगर किसी कंपनी के पास 10 कारें हैं, जिनमें पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और ईवी शामिल हैं तो उनसे कितना प्रदूषण हो रहा है, इसको एक साथ देखा जाता है।

कब होगा लागू

अब तक इसको लेकर 2 ड्राफ्ट आ चुके हैं। पिछले साल जो ड्राफ्ट जारी किया गया था, उसमें 4 मीटर से कम लंबी कारों को 1200 सीसी से छोटे इंजन और 909 किलोग्राम तक के वजन के साथ छूट देने की बात कही गई थी। जिसके बाद विवाद हुआ और बाद में राहत को ड्राफ्ट से हटाया गया। अब इसे 2027 से लागू किया जा सकता है और इसमें कार मेकर्स की ओर से बेची जाने वाली कारों का एवरेज फ्यूल कंज्‍मप्‍शन हर 100 किलोमीटर में 3.73 तक करना होगा, जो 2032 तक 3.01 लीटर तक करना होगा। ऐसा करने में फेल होने वाली कंपनियों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।

बढ़ जाएंगी प्राइज

कारों की फ्यूल एफिशिएंसी को बढ़ाने के लिए मेकर्स को नई टेक्‍नोलॉजी को लाना होगा या फिर कारों के इंजन को और डेवलप करना होगा। जिसमें समय तो लगेगा ही साथ ही खर्च भी होगा। जिसे मेकर्स अपने कस्‍टमर्स से वसूलेंगे और इसके लिए कारों की प्राइज बढ़ जाएगी।